20 जून 2019 - 15:50
ख़ाशुक़्जी हत्या केस और सऊदी अरब को अमरीका की ओर से जारी समर्थन

सऊदी शासन के आलोचक पत्रकार जमाल ख़ाशुक़्जी की निर्मम हत्या के 9 महीने गुज़रने के बाद संयुक्त राष्ट्र संघ की विशेष प्रतिवेदक ऐग्नेस कैलमर्ड ने सऊदी युवराज सहित इस देश के उच्चपदस्थ अधिकारियों के इस पत्रकार की हत्या में लिप्त होने की सूचना दी है।

कैलमर्ड ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव से अंतर्राष्ट्रीय जांच दल के गठन की मांग की जो मोहम्मद बिन सलमान से ख़ाशुक़्जी की हत्या के मामले में पूछताछ करे।

अमरीका के रिपब्लिकन सेनेटर लिंडसे ग्राहम ने बिन सलमान को ख़ाशुक़्जी की हत्या का मुख्य रूप से आदेश देने वाला बताते हुए कहा कि यह मानना नामुमकिन है कि एक टीम विमान से तुर्की जाए, सऊदी युवराज के आलोचक को इस देश के तुर्की में दूतावास में जान से मार कर उसके हाथ पैर काट डाले और यह काम बिन सलमान की सहमति के बिना हुआ हो।

विरोधियों और सामाजिक व राजनैतिक कार्यकर्ताओं का दमन और उन्हें मौत की सज़ा, ख़ाशुक़्जी की हत्या, यमन जंग का जारी रहना और इस देश की निहत्थी जनता का नरसंहार और आतंकवादी गुटों का समर्थन पिछले कुछ साल में सऊदी शासन के कृत्यों के उदाहरण हैं।

ख़ाशुक़्जी की हत्या के 9 महीने बाद भी यह केस अभी भी विश्व जनमत के ध्यान का केन्द्र बना हुआ है। यद्यपि सऊदी शासन ने ऐग्नस कैलमर्ड की रिपोर्ट पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दिखायी और न ही इंकार किया लेकिन आंतरिक व विदेशी स्तर पर जनमत सऊदी अरब और इस जुर्म के अपराधियों के दंडित होने का इंतेज़ार कर रहा है।

ऐसे हालात में वॉशिंग्टन एक बार फिर सऊदी अरब का समर्थन करने की कोशिश कर रहा है। जैसा कि अमरीकी फ़ेडरल पुलिस का कहना है कि इस संस्था की इस समय ख़ाशुक़्जी की हत्या के ज़िम्मेदारों के संबंध में योरोपीय संघ के प्रतिवेदक की रिपोर्ट पर किसी तरह की प्रतिक्रिया दिखाने में कोई रूचि नहीं है।

ऐसा लगता है कि ख़ाशुक़्जी की हत्या जैसे अपराध के संबंध में अमरीका की ख़ामोशी ने सऊदी शासन को मानवता विरोधी अपराध के लिए दुस्साहसी बना दिया है जिसकी मिसाल अभी हाल में सऊदी अरब में सामूहिक रूप से लोगों को मौत की सज़ा दिया जाना और यमन के ख़िलाफ़ जंग का जारी रहना तथा इस देश की जनता के ख़िलाफ़ इस शासन के जारी अपराध हैं।